छठ पूजा 2026: सूर्य षष्ठी महाव्रत, छठी मैया की उपासना और अमोघ अर्घ्य विधान
कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर मनाए जाने वाले महालोक पर्व छठ पूजा की संपूर्ण विधि, कथा, और सूर्य देव की उपासना के प्रामाणिक नियम जानें।

छठ पूजा 2026: सूर्य षष्ठी महाव्रत, छठी मैया की उपासना और अमोघ अर्घ्य विधान
सनातन संस्कृति में लोक आस्था, प्रकृति प्रेम, स्वच्छता और सूर्य उपासना का यदि कोई सबसे पवित्र और महान पर्व है, तो वह है 'छठ महापर्व'। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाने वाला यह चार दिवसीय अनुष्ठान केवल एक व्रत नहीं है, बल्कि यह भौतिक शरीर, प्राण ऊर्जा और आत्मा की शुद्धि का एक अद्भुत विधान है। इस महापर्व में किसी पाषाण मूर्ति की नहीं, बल्कि साक्षात प्रत्यक्ष देवता भगवान भास्कर (सूर्य देव) और उनकी शक्ति स्वरूपा प्रकृति देवी 'छठी मैया' की उपासना की जाती है।
छठ महापर्व का पौराणिक महत्व और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
शास्त्रों के अनुसार, छठ व्रत की परंपरा त्रेता युग और द्वापर युग से चली आ रही है। रावण वध के पश्चात भगवान श्रीराम और माता सीता ने अयोध्या लौटने पर कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन भगवान सूर्य की आराधना कर अनुष्ठान किया था। वहीं दूसरी ओर, महाभारत काल में पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने अपना खोया हुआ राज्य और वैभव पुनः प्राप्त करने के लिए महर्षि धौम्य के उपदेशानुसार सूर्य षष्ठी का यह कठिन निर्जला व्रत किया था।
सूर्य देव की यह उपासना न केवल आरोग्य, आयु और संतान सुख प्रदान करती है, बल्कि यह जीवन के समस्त अंधकार को मिटाकर प्रकाश और सकारात्मकता का संचार करती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य देव आत्मा के कारक हैं और उनकी आराधना से कुंडली के समस्त सूर्य जनित दोष और नेत्र विकार शांत होते हैं।
चार दिवसीय छठ महापर्व के चरण और नियम
यह महापर्व लगातार चार दिनों तक अत्यंत कठोर नियमों और पूर्ण पवित्रता के साथ मनाया जाता है:
- नहाय-खाय (चतुर्थी तिथि): इस दिन व्रत का शुभारंभ होता है। व्रती महिलाएं स्नान करके शुद्ध सात्विक भोजन (विशेषकर कद्दू-भात) ग्रहण करती हैं। इसके बाद पूरे घर और रसोई की विशेष रूप से साफ-सफाई की जाती है।
- खरना या लोहंडा (पंचमी तिथि): इस दिन पूरा दिन निर्जला उपवास रखा जाता है। संध्याकाल में गुड़ की खीर और चपाती का प्रसाद बनाकर भगवान सूर्य को भोग लगाया जाता है और व्रती महिलाएं इसी प्रसाद को ग्रहण कर अगले 36 घंटों के निर्जला व्रत का संकल्प लेती हैं।
- संध्या अर्घ्य (षष्ठी तिथि): यह छठ महापर्व का मुख्य दिन होता है। इस दिन बांस की टोकरी (सूप) में मौसमी फल, ठेकुआ, चावल के लड्डू और गन्ना सजाकर दिव्य प्राचीन स्थानों पर (Divya Prachin Sthano Pe) स्थित पवित्र जलाशयों, नदियों और घाटों पर जाकर अस्ताचलगामी (ढलते हुए) सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाता है।
- उषा अर्घ्य और पारण (सप्तमी तिथि): महापर्व के अंतिम दिन प्रातःकाल उगते हुए सूर्य (उदीयमान सूर्य) को दूसरा अर्घ्य दिया जाता है। इसके पश्चात कच्चे दूध और प्रसाद से व्रत का पारण (समापन) किया जाता है।
स्वास्थ्य, आयु और आरोग्य हेतु विशेष वैदिक अनुष्ठान
छठ पूजा के इन पवित्र दिनों में भगवान सूर्य की उपासना के साथ-साथ आरोग्यता और दीर्घायु की प्राप्ति के लिए रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का अनुष्ठान अत्यंत फलदायी माना जाता है। यदि आपके जीवन में शारीरिक कष्ट, आरोग्य की कमी या अज्ञात भय बना हुआ है, तो आपको 👉
छठ पूजा में वर्जित बातें और विशेष सावधानियां
- शुद्धता का विशेष ध्यान: इस पर्व में शारीरिक और मानसिक पवित्रता सर्वोपरि है। प्रसाद बनाते समय लहसुन-प्याज या तामसिक वस्तुओं का प्रयोग पूर्णतः वर्जित है।
- साफ बर्तनों का प्रयोग: ठेकुआ और प्रसाद बनाने के लिए नए या केवल छठ पूजा के लिए आरक्षित किए गए पीतल या मिट्टी के बर्तनों का ही उपयोग किया जाता है。
- बांस के सूप और दौरा: पूजा की सामग्री हमेशा बांस से बनी टोकरी या सूप में ही रखी जाती है, जिसे शुभता और वंश वृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
निष्कर्ष
छठ महापर्व हमें यह सिखाता है कि प्रकृति के बिना हमारा अस्तित्व असंभव है। उगते सूर्य के साथ-साथ ढलते सूर्य को प्रणाम करना हमारी संस्कृति की उस विशाल दृष्टि का परिचायक है जो हर अवस्था में सम्मान और कृतज्ञता सिखाती है। इस वर्ष छठ पूजा 2026 के इस पावन अवसर पर पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से छठी मैया का पूजन करें और अपने जीवन को आरोग्य व ऐश्वर्य से परिपूर्ण करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
Q1. छठ पूजा का व्रत कितने घंटों का होता है?
छठ पूजा का मुख्य व्रत लगभग 36 घंटे का निर्जला उपवास होता है, जो खरना की शाम से शुरू होकर सप्तमी तिथि को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद समाप्त होता है।
Q2. छठ पूजा में अस्ताचलगामी सूर्य को ही अर् क्यों दिया जाता है?
सनातन संस्कृति में जीवन के हर पड़ाव का सम्मान है। ढलते हुए सूर्य को अर्घ्य देना इस बात का प्रतीक है कि जो अस्त हुआ है, उसका उदय होना भी निश्चित है, जो प्रकृति का शाश्वत नियम है।
Q3. छठ पूजा का प्रसाद मुख्य रूप से क्या होता है?
छठ पूजा का मुख्य प्रसाद शुद्ध घी और गुड़ से बना 'ठेकुआ', चावल के लड्डू, मौसमी फल और गन्ना होता है।

