माघ सोमवती अमावस्या 2026: पितृ दोष शांति, पवित्र गंगा स्नान एवं तुलसी पूजन की संपूर्ण शास्त्रीय विधि
माघ मास में पड़ने वाली सोमवती अमावस्या अत्यंत पुण्यदायी और दुर्लभ संयोग लेकर आती है। जानिए पितृ दोष से मुक्ति, गंगा स्नान, तुलसी की 108 परिक्रमा और शिव-शनि पूजन की प्रामाणिक विधि।

माघ सोमवती अमावस्या 2026: पितृ दोष शांति, पवित्र गंगा स्नान एवं तुलसी पूजन की संपूर्ण शास्त्रीय विधि
माघ मास में पड़ने वाली सोमवती अमावस्या अत्यंत पुण्यदायी और दुर्लभ संयोग लेकर आती है। जानिए पितृ दोष से मुक्ति, गंगा स्नान, तुलसी की 108 परिक्रमा और शिव-शनि पूजन की प्रामाणिक विधि।
सनातन धर्म की पावन परंपरा में माघ मास का प्रत्येक दिन अति पवित्र माना गया है, परंतु जब माघ मास की अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तो यह 'माघ सोमवती अमावस्या' का अत्यंत दुर्लभ एवं सिद्ध महासंयोग निर्मित करती है। पद्म पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार, सोमवती अमावस्या के दिन तीर्थ स्नान, दान, जप और पितृ तर्पण करने से सहस्र गोदान का फल प्राप्त होता है।
वर्ष 2026 की माघ सोमवती अमावस्या धर्मानुरागी साधकों, पितृ दोष से पीड़ित जातकों और अक्षय पुण्य की कामना करने वाले भक्तों के लिए अत्यंत मंगलकारी अवसर लेकर आ रही है। इस पावन तिथि पर गंगा स्नान, पीपल एवं तुलसी पूजन और पितरों के निमित्त किया गया तर्पण जीवन के समस्त पापों का शमन कर संतति, सुख और संपत्ति का आशीर्वाद प्रदान करता है।
माघ सोमवती अमावस्या का पौराणिक एवं शास्त्रीय महत्व
शास्त्रों में अमावस्या तिथि को पितरों का दिन माना गया है, और जब यह सोमवार—अर्थात भगवान चंद्रमौलेश्वर शिव के प्रिय वार—को पड़ती है, तो इसकी महिमा अनंत गुना बढ़ जाती है। महाभारत के अनुशासन पर्व में पितामह भीष्म ने धर्मराज युधिष्ठिर को सोमवती अमावस्या का महत्व समझाते हुए कहा था कि इस दिन जो भी मनुष्य पवित्र नदियों में स्नान कर पितरों का ध्यान करता है, उसके कुल का कोई भी प्राणी कभी दुर्गति को प्राप्त नहीं होता।
माघ मास स्वयं में ‘माधव’ (भगवान विष्णु) का स्वरूप है। इस मास में जल में अम्रित का वास माना गया है:
"माघे मज्जनमम्भसि यत्र कुत्रापि पावनम्।"
अर्थात माघ के महीने में किसी भी पावन नदी या जलाशय में स्नान करना अत्यंत फलदायी है। सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव और माता पार्वती का संयुक्त पूजन करने से अखंड सौभाग्य, पारिवारिक शांति और आरोग्य की प्राप्ति होती है।
गंगा स्नान एवं पावन संकल्प विधि
सोमवती अमावस्या के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व ब्राह्ममुहूर्त में उठना शास्त्रीय दृष्टि से अनिवार्य माना गया है।
1. गंगा स्नान के नियम:
- यदि संभव हो तो दिव्य प्राचीन स्थान, प्रयागराज, दिव्य प्राचीन स्थान या किसी भी पवित्र तीर्थस्थल पर जाकर गंगा अथवा पवित्र नदियों में स्नान करें।
- यदि तीर्थ क्षेत्र में जाना संभव न हो, तो घर पर ही साधारण जल में थोड़ा-सा गंगाजल, तिल और कुशा डालकर स्नान करें। स्नान करते समय मन ही मन गंगा जी का ध्यान करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें:
"गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।"
"नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥"
2. अर्घ्यदान व सूर्य पूजन:
स्नान के पश्चात तांबे के पात्र में जल, लाल चंदन, अक्षत और लाल पुष्प डालकर भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य प्रदान करें। सूर्य अर्घ्य देते समय "ॐ सूर्याय नमः" या "ॐ घृणिः सूर्याय नमः" मंत्र का जाप करें।
पितृ दोष शांति एवं तर्पण की प्रामाणिक विधि
अमावस्या तिथि पितृगणों को तृप्त करने के लिए सर्वोत्तम मानी गई है। जिन जातकों की कुंडली में पितृ दोष, गृह क्लेश, संतति बाधा या व्यापार में निरंतर हानि हो रही हो, उन्हें माघ सोमवती अमावस्या के दिन निम्नलिखित शास्त्रीय उपाय अवश्य करने चाहिए:
तर्पण एवं श्राद्ध विधि:
- कुशा एवं तिल का प्रयोग: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके कुशा की पैंती (अंगूठी) अनामिका उंगली में धारण करें। हाथों में जल, काले तिल और सफेद पुष्प लेकर पितरों का स्मरण करें।
- तर्पण मंत्र: जल अर्पित करते हुए तीन बार कहें—
"ॐ पितृभ्यः नमः" या "अस्मत्पितृन् तृप्यन्तु"। - पिंडदान व ब्राह्मण भोजन: इस दिन तिल, गुड़, कंबल, अनाज और वस्त्र का दान किसी योग्य वेदपाठी ब्राह्मण को दें। गाय, कुत्ते, कौवे और चींटियों के लिए भोजन का अंश (पंचबली) अवश्य निकालें।
यदि आपके जीवन में निरंतर बाधाएं, बीमारियां या मानसिक अशांति बनी हुई है, तो सोमवती अमावस्या के पावन अवसर पर भगवान शिव का महामृत्युंजय जाप और रुद्राभिषेक कराना अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
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तुलसी पूजन एवं 108 परिक्रमा का विधान
सोमवती अमावस्या के दिन तुलसीजी की पूजा और परिक्रमा का विशेष विधान है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन तुलसीजी की परिक्रमा करने से साक्षात भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का स्थायी वास गृह में होता है।
तुलसी परिक्रमा की संपूर्ण विधि:
- स्नान के पश्चात तुलसी के पौधे को स्वच्छ जल अर्पित करें और रोली, गोपीचंदन, अक्षत व धूप-दीप से पूजन करें।
- तुलसी महारानी को लाल चुनरी और सुहाग की वस्तुएं अर्पित करें।
- 108 परिक्रमा संकल्प: इसके पश्चात तुलसीजी की 108 बार परिक्रमा करें। प्रत्येक परिक्रमा पूरी होने पर एक फल, मखाना, मूंगफली, मिष्ठान या कोई भी सात्विक वस्तु तुलसी जी के पास रखें।
- परिक्रमा के समय निरंतर इस मंत्र का जाप करें:
"महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी।"
"आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोऽस्तु ते॥"
- परिक्रमा पूर्ण होने के पश्चात अर्पित की गई सामग्री को छोटी कन्याओं या जरूरतमंदों में बांट दें। इससे अखंड सौभाग्य और धन-धान्य की वृद्धि होती है।
यदि आपके परिवार पर अत्यधिक कर्ज का बोझ है और आर्थिक दरिद्रता पीछा नहीं छोड़ रही है, तो इस शुभ तिथि पर अष्टलक्ष्मी महायज्ञ से विशेष फल प्राप्त होता है।
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पीपल वृक्ष पूजन: त्रिमूर्ति का आशीर्वाद
शास्त्रानुसार पीपल के वृक्ष के मूल में भगवान ब्रह्मा, मध्य में भगवान विष्णु और अग्रभाग में देवाधिदेव महादेव का वास होता है। सोमवती अमावस्या के दिन पीपल पूजन का विशेष महत्व है:
- जल अर्पण: पीपल की जड़ में कच्चा दूध, जल, काले तिल और थोड़ा सा गुड़ मिलाकर अर्पित करें।
- दीपक प्रज्वलन: सायंकाल पीपल के नीचे सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं।
- शनि दोष निवारण: पीपल के नीचे दीपक जलाने और 7 बार परिक्रमा करने से शनि की साढेसाती, ढैय्या और राहु-केतु के अशुभ प्रभावों का शमन होता है।
यदि आपकी राशि पर शनि की साढेसाती या ढैय्या का प्रभाव चल रहा है, तो इस दिन विशेष शनि शांति अनुष्ठान कराना श्रेयस्कर होता है।
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सोमवती अमावस्या पर किए जाने वाले अचूक तंत्र व शत्रु बाधा निवारण उपाय
अमावस्या की रात्रि तंत्र और मंत्र साधना के लिए अत्यंत तीव्र मानी गई है। यदि आपके गुप्त शत्रु आपके कार्यों में निरंतर विघ्न डाल रहे हैं, कोर्ट-कचहरी के विवाद बने हुए हैं या कोई अज्ञात भय सता रहा है, तो इस पावन रात्रि को भगवती बगलामुखी का ध्यान करना चाहिए।
अमावस्या की रात्रि में सरसों के तेल का दीपक जलाकर "ॐ ह्लीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय..." का पाठ करने से शत्रुओं की कुदृष्टि से रक्षा होती है।
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माघ सोमवती अमावस्या: क्या करें और क्या न करें?
क्या करें (Do's):
- प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व स्नान कर मौन व्रत या सात्विक आचरण का पालन करें।
- पितरों के नाम से तिल, वस्त्र, गाय को हरा चारा और अन्न दान करें।
- तुलसी और पीपल वृक्ष की विधिपूर्वक पूजा एवं परिक्रमा करें।
- भगवान शिव पर कच्चे दूध में काले तिल मिलाकर जलाभिषेक करें।
क्या न करें (Don'ts):
- इस दिन तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा) का सेवन भूलकर भी न करें।
- किसी भी वृद्ध, असहाय व्यक्ति या माता-पिता का अनादर न करें।
- घर में क्लेश, क्रोध या असत्य भाषण से बचें।
- दिन के समय सोने से बचें और निरंतर भगवन्नाम का स्मरण करें।
निष्कर्ष
माघ सोमवती अमावस्या केवल एक पर्व नहीं, अपितु आत्मिक शुद्धि, पितृ ऋण से मुक्ति और भगवान शिव-विष्णु की अनुकंपा प्राप्त करने का महा-अवसर है। इस दिन पूर्ण श्रद्धा और भक्ति भाव से किए गए स्नान, दान और पूजन से जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं। दिव्य यज्ञ (DivyaYagyam) के विद्वान आचार्यों द्वारा शास्त्रोक्त विधि से कराए जाने वाले अनुष्ठानों के माध्यम से आप भी अपने घर बैठे इन पावन अवसरों का आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Frequently Asked Questions)
Q1. माघ सोमवती अमावस्या क्यों खास मानी जाती है?
माघ मास में पड़ने वाली सोमवती अमावस्या में गंगा स्नान, तिल दान, तुलसी परिक्रमा और पितृ तर्पण का फल हजार गुना बढ़ जाता है। इस दिन शिव और विष्णु दोनों की कृपा एक साथ प्राप्त होती है।
Q2. यदि गंगा स्नान के लिए न जा सकें तो घर पर कैसे स्नान करें?
घर पर ही साधारण स्नान के जल में थोड़ा-सा गंगाजल, तिल और कुशा डालकर स्नान करें और गंगा मैया का स्मरण करें। इससे तीर्थ स्नान के समान ही पुण्य प्राप्त होता है।
Q3. सोमवती अमावस्या पर तुलसी की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए?
सोमवती अमावस्या के दिन तुलसी जी की 108 बार परिक्रमा करने का शास्त्रीय विधान है। प्रत्येक परिक्रमा पर फल, मिष्ठान या कोई सात्विक वस्तु अर्पित की जाती है।
Q4. पितृ दोष शांति के लिए सोमवती अमावस्या पर क्या दान करना चाहिए?
पितृ दोष से मुक्ति के लिए काले तिल, गुड़, उड़द, गर्म वस्त्र, तिल के लड्डू, अनाज और तांबे के बर्तन का दान किसी वेदपाठी ब्राह्मण या जरूरतमंद को करना चाहिए।
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